जिन लोगो को अपने परिजनों और अपने पुत्रों पर अहंकार था।
की मुझे दुनिया से क्या मतलब
संपति है पुत्र है और मेरा पुत्र ही मेरा अंतिम संस्कार करेगा।
वो सभी इस को ध्यान से देख ले।
कर्मफल ही साथ चलेगा
ईष्वर ही सत्य है।बाकी सब मिथ्या है।
उस ईश्वर के आगे कोई चालाकी नही चलती, पूरी ज़िंदगी आप कितनी ही बाज़ी खेल लो
पर कुदरत का फेका हुआ हुकुम का एक इक्का आपकी सारी बाज़ी पलट देता है
चांद ओर मंगल पे जाके
पूरे ब्रह्मांड पे कब्जा करने की सोचने वाला इंसान आज धरती पर भी चैन से नही रहे पा रहा।
मेरा दुकान, मेरी गाड़ी, मेरा वैभव सब पड़ा है रद्दी की तरह
अब भी वक़्त है
जान जाओ कुदरत को
ओर नित्य सत्कर्म करो, किसी का दिल दुखाओगे तो बच नही पाओगे ये तो कुछ भी नहीं है अभी तो बहुत सिन बाकी हैं ओम् शान्ति

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